Wednesday, April 30, 2025

अक्षय तृतीया ( छत्तीसगढ़ का अक्ति पानी ) त्यौहार -

अक्षय तृतीया एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जो वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।  यह इस साल 2025 में 30 अप्रेल को मनाया जा रहा है. हिंदी में क्षय का अर्थ होता हैँ नष्ट होना तथा इसका विलोम है अक्षय यानि जिसका कभी क्षय (खात्मा) न हो. 'अक्षय' का अर्थ है 'कभी न खत्म होने वाला' या 'अनंत', इसलिए इस दिन किए गए किसी भी शुभ कार्य का फल अक्षय होता है। यह त्योहार पूरे भारत में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

अकती (अक्ति या ) पानी - छत्तीसगढ़ में अक्षय तृतीया पर्व को अकती (अक्ति) कहते हैँ. चूंकि छत्तीसगढ़ कृषि प्रधान क्षेत्र रहा है सो यहाँ के त्यौहार एवं परंपराएं भी ज्यादातर इसी से जुड़ी हुईं हैँ. 
छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण त्यौहार अक्ती तिहार (अक्षय तृतीया) और "अकती पानी" के बारे में विस्तार से जानिए.
अक्ती तिहार (अक्षय तृतीया) छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण त्यौहार
अक्ती तिहार, जिसे अक्षय तृतीया के नाम से भी जाना जाता है, छत्तीसगढ़ में एक महत्वपूर्ण कृषि और सांस्कृतिक त्यौहार है। यह त्यौहार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। "अक्षय" का अर्थ है "कभी न खत्म होने वाला" और माना जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य अक्षय फल देते हैं।

महत्व और परंपराएं:
 * कृषि से जुड़ाव: अक्ती तिहार मुख्य रूप से किसानों का त्यौहार है। इस दिन किसान अपने खेतों में नए बीज डालते हैं और अच्छी फसल की कामना करते हैं। यह त्यौहार खरीफ की फसल की शुरुआत का प्रतीक है।
 * मिट्टी का पूजन: इस दिन मिट्टी और कृषि उपकरणों की पूजा की जाती है, जो धरती माता और कृषि के प्रति सम्मान व्यक्त करता है।
 * गुड्डा-गुड़ियों का विवाह: अक्ती तिहार की एक अनूठी परंपरा मिट्टी के बने गुड्डा-गुड़ियों (पुतरा-पुतरी) का विवाह कराना है। बच्चे बड़े उत्साह के साथ इस विवाह को पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराते हैं। यह परंपरा रिश्तों के महत्व और पारिवारिक जीवन के प्रति सम्मान सिखाती है।
 * पितरों का स्मरण: इस दिन बुजुर्ग घर में नए मटके में पानी भरकर रखते हैं और अपने पितरों (पूर्वजों) का आह्वान करते हैं। नदी या तालाब में तर्पण भी किया जाता है।
 * शुभ कार्यों के लिए महत्व: अक्षय तृतीया को छत्तीसगढ़ में सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों, जैसे विवाह, सगाई, गृह प्रवेश और नए व्यवसाय की शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन बिना मुहूर्त देखे भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
 * दान का महत्व: इस दिन दान-पुण्य करना भी बहुत शुभ माना जाता है। लोग अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को दान करते हैं।

"अकती पानी" का महत्व:
"अकती पानी" अक्ती तिहार से जुड़ी एक महत्वपूर्ण रस्म है। इस दिन किसान अपने खेतों में पानी ले जाते हैं और उसका छिड़काव करते हैं। इसके पीछे मान्यता है कि ऐसा करने से वरुण देव प्रसन्न होते हैं और खरीफ की फसल के लिए पर्याप्त वर्षा होती है। यह फसल को बीमारियों से बचाने की कामना का भी प्रतीक है।

संक्षेप में, अक्ती तिहार छत्तीसगढ़ का एक जीवंत और महत्वपूर्ण त्यौहार है जो कृषि, संस्कृति और परंपराओं का सुंदर मिश्रण है। "अकती पानी" इस त्यौहार का एक अभिन्न अंग है जो अच्छी फसल और पर्याप्त वर्षा की कामना से जुड़ा हुआ है।

पौराणिक  कथाएँ एवं महत्व - 
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन त्रेता युग की शुरुआत हुई थी। यह भी माना जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ था। एक और महत्वपूर्ण मान्यता यह है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। महाभारत की एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, द्रौपदी को चीर हरण से बचाने के लिए भगवान कृष्ण ने उन्हें अक्षय पात्र प्रदान किया था, जिससे कभी भी भोजन समाप्त नहीं होता था। इन सभी कारणों से अक्षय तृतीया का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है।

कैसे मनाते हैँ??? - 
अक्षय तृतीया को दान-पुण्य और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दिन लोग सोना, चांदी, भूमि, वाहन और अन्य मूल्यवान वस्तुएं खरीदते हैं क्योंकि यह माना जाता है कि इस दिन किया गया निवेश भविष्य में समृद्धि लाता है। कई लोग इस दिन नए व्यापार या उद्यम की शुरुआत करते हैं। विवाह जैसे शुभ कार्य भी इस दिन बिना किसी मुहूर्त के किए जाते हैं, क्योंकि यह पूरा दिन ही अत्यंत शुभ माना जाता है।
इस दिन पितरों का तर्पण करना भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और दान करते हैं। ब्राह्मणों को भोजन और वस्त्र दान किए जाते हैं। जल से भरे कलश, पंखे, छाते, जूते और अन्य गर्मी से राहत दिलाने वाली वस्तुओं का दान करना भी इस दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। कई घरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और भोग लगाया जाता है। कुछ स्थानों पर भगवान विष्णु के परशुराम अवतार की भी पूजा की जाती है। मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं और भक्त भगवान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में एकत्रित होते हैं।

सामाजिक महत्व - 
यह त्योहार सामाजिक समरसता और दान की भावना को भी बढ़ावा देता है। लोग अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों और जरूरतमंदों को दान करते हैं। कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं इस दिन सामूहिक दान और भंडारे का आयोजन करती हैं।

क़ृषि में महत्व - 
अक्षय तृतीया का कृषि समुदाय के लिए भी विशेष महत्व है। कुछ क्षेत्रों में किसान इस दिन अच्छी फसल की कामना के साथ बीज बोने की शुरुआत करते हैं। यह दिन नई शुरुआत और समृद्धि का प्रतीक है।

Coclusion - 
संक्षेप में, अक्षय तृतीया एक ऐसा त्योहार है जो धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों का संगम है। यह हमें दान, पुण्य और शुभ कर्मों के महत्व को याद दिलाता है और नई शुरुआत करने की प्रेरणा देता है। इस दिन किए गए कार्य अक्षय फलदायी होते हैं, यही कारण है कि यह त्योहार भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखता है।

No comments:

Post a Comment