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Sunday, February 23, 2025

crazy dilemmma

Crazy Dilemma - इंसान जब प्यार मुहब्बत में होता है तो दुनिया बड़ी हसीन और खूबसूरत सी लगती है... दुनिया तो वही की वही होती है पर प्रेम में पड़ा मनुष्य अपने खयालों में ही अपनी एक अलग दुनिया बना लेता है...प्रेम में पड़े मनुष्य के ख़यालों को पँख से लग जाते हैँ..कानों में रुमानी संगीत सा बजता रहता है...मनोभावों में उसे उस मशहूर गाने सा महसूस होता है कि -आजकल पाँव जमीं पर नहीं पड़ते मेरे...काफी कुछ ऐसी ही फीलिंग्स होती है...तब जेहन बड़ा खुशनुमा सा होता है, ऐसे में ख़यालों में और मुंह से निकले शब्द भी बड़े कोमल से और नाजुक से निकलते हैँ...उनमें भी प्रेम छिपा होता है..

जैसे की इस एक गीत की शुरआती लाइनों में है, ज़रा गौर करें - 

शफ़क़ हो,  फूल हो,  शबनम हो, माहताब हो तुम,
नहीं जवाब तुम्हारा, के लाजवाब हो तुम...

[शफ़क़ = लालिमा, सुबह या शाम के वक़्त की आकाश की लालिमा, गुलाबी किरणेँ (इसका equivalent English word पता नहीं है );    शबनम =ओस, dew ;    माहताब = चन्द्रमा, moon ] 

अब आप शायद तक से जान ही गए होंगे कि ये तो एक बेहद प्यारे गीत की शुरआत है और इसके बाद शुरू होने वाला गीत भी बड़ा ही प्यारा है... बस ज़रा सी बदकिस्मती है गाने की कि ज़रा कम प्रसिद्ध हुआ है. वैसे 40s की उम्र वाले लोग जिन्हे quadragerian कहा जाता है उन्होंने शायद ये गाना ज़रूर सुना होगा..वो लोग जिन्होंने कैसेट्स वाली 90s की ज़रा स्लो सी दुनिया को देखा और जिया है वो इसे ज़रूर जानते होंगे..गीत कुछ यूँ है -

मैं कैसे कहूँ जानेमन, तेरा दिल सुने मेरी बात,
ये आँखों की सियाही, ये होंठों का उजाला,
ये ही हैं मेरे दिन–रात.., 
मैं कैसे कहूँ जानेमन...

सुनियेगा कभी इस भागती दौड़ती सी दुनिया में दौड़ते भागते समय जिंदगी को ज़रा सा 5 मिनट के लिए pause करके ...आशा है पसंद आएगा.

 जहाँ तक पता है कि फ़िल्म पूरी बनकर रिलीज भी नहीं हो पायी थी,  जबकि उस वक़्त के नामी गिरामी कलाकर संजय दत्त और ज़ेबा बख्तियार  मुख्य भूमिकाओं में थे ( उन दिनों ज़ेबा बख्तियार को राज कपूर बैनर की सुपर हिट फ़िल्म हिना से  इंट्रोडयूस होने के कारण बहुत hype मिला हुआ था, जैसा कि अभी कुछ सालों पहले पुष्पा फेम रश्मिका मन्धाना को अच्छा खासा हाइप मिला हुआ था ). फ़िल्म के कुछ और गाने भी बेहद खूबसूरत थे, पूरा एल्बम  अच्छा था. फ़िल्म का नाम है नरगिस Nargis (जिसके गाने की कैसेट साल 1992-93 में  आयी थी ). इसे गाने को गाया है महान ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह साहब ने, लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने और संगीतकार हैँ बासु चक्रवर्ती (ये ज़रा कम फेमस नाम हैँ पर जानकारी के लिए याद रखें कि ये महान आर डी बर्मन साहब यानि पंचम के बहुत सालों तक सहायक एवं म्यूजिक अरेंजर रहे हैँ ) ...
पहले के फ़ास्ट टेम्पो वाले तेज़ गीत भी आज की तुलना में स्लो होते थे..यह गीत भी काफी स्लो है.. ठहराव की भी अपनी खूबीयाँ और ख़ूबसूरती होती है... गीतों में शब्दों का चयन, उनकी लम्बाई, उच्चारण, मीटर, तथा जायका होता है. साथ में बज रहे वाद्य यन्त्रों के साथ उसका तालमेल मौसिकी और synchronization जिससे सही भाव पैदा हों तथा सुनने वाला श्रोता उस लक्षित भाव को महसूस कर सके ये सब काफी महत्वपूर्ण होता है. इस गीत को सुनकर महसूस होता है कि इस रोमांटिक प्रेमगीत में इसके रचयिता एक्सपर्ट लोगों ने इन सब बातों का काफी गहराई से खयाल रखा है तथा गीत बहुत ही सुंदर बन पड़ा है...

पिछले दिनों पता नहीं किस बात पे अचानक ही ये गाना याद आ गया..उन दिनों 14  February का दिन पास था पर किसी ने इस गाने का ज़िक्र नहीं किया. जबकि ये गाना romantic गानों की list में होना deserve करता है ..

.. at last..सभी के जीवन में प्रेम, शांति, सामंजस्य, आशाएं, उल्लास, ज़रा सा ठहराव एवं सुकून तथा सहजीविता बनी रहे..

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.. at last समय हो तो इस melodious Song को सुनने का आनंद लें..अपना और सबका जीवन खूबसूरत बनाएं, जिंदगी अनमोल है, दुनिया को बेहतर बनाने में अपना उचित योगदान दें ..और हाँ संगीत को जीवन में रखें..जादुई चीज़ है...